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27 साल बाद इंसाफ: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने CISF कांस्टेबल को किया बहाल, बर्खास्तगी आदेश रद्द

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देश की न्यायपालिका ने एक बार फिर साबित कर दिया कि न्याय देर से मिले, लेकिन मिलता जरूर है।
Punjab and Haryana High Court ने एक ऐतिहासिक फैसले में Central Industrial Security Force (CISF) के एक कांस्टेबल को 27 साल बाद सेवा में बहाल करने का आदेश दिया है। अदालत ने 1998 में दिए गए बर्खास्तगी आदेश को अवैध और प्रक्रिया-विरोधी करार दिया।
यह फैसला न केवल एक CISF जवान के लिए, बल्कि सभी अर्धसैनिक बलों के कर्मियों के अधिकारों के लिए एक बड़ी जीत माना जा रहा है।


🔴 क्या है पूरा मामला?


मामला वर्ष 1998 का है, जब CISF के एक कांस्टेबल को विभागीय कार्रवाई के तहत सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। आरोपों के आधार पर यह कार्रवाई की गई, लेकिन जवान ने शुरू से ही दावा किया कि:
उसे पूरी तरह अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया
विभागीय जांच में न्यायिक प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ
सजा अत्यधिक और अनुचित थी
इसके बाद जवान ने न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया, लेकिन मामला वर्षों तक लंबित रहा।

⚖️ हाईकोर्ट का अहम फैसला


लंबी कानूनी लड़ाई के बाद पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा कि:
“विभागीय जांच में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ है। ऐसे में बर्खास्तगी का आदेश टिकाऊ नहीं है।”
अदालत ने:
बर्खास्तगी आदेश को रद्द कर दिया
CISF को कांस्टेबल को सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया
सभी सेवा लाभ (Service Benefits) देने का आदेश भी दिया
यह फैसला उन सभी जवानों के लिए उम्मीद की किरण है, जो वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

CISF जवानों के लिए बड़ा संदेश


यह निर्णय स्पष्ट करता है कि:
वर्दीधारी जवानों के साथ भी न्यायिक निष्पक्षता अनिवार्य है
विभागीय कार्रवाई में कानून और प्रक्रिया से समझौता नहीं किया जा सकता
जवानों के मौलिक अधिकार सुरक्षित हैं
सेना, CISF और अन्य अर्धसैनिक बलों से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में विभागीय कार्रवाइयों के लिए एक मिसाल बनेगा।

📌 27 साल का संघर्ष, आखिरकार जीत


27 वर्षों तक कानूनी लड़ाई लड़ना किसी भी व्यक्ति के लिए आसान नहीं होता, खासकर एक ऐसे जवान के लिए जिसने देश की सुरक्षा में अपना जीवन लगाया हो। यह फैसला बताता है कि सच्चाई और धैर्य के साथ लड़ी गई लड़ाई अंततः रंग लाती है।
🔍 निष्कर्ष
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का यह फैसला न सिर्फ एक CISF कांस्टेबल की बहाली का मामला है, बल्कि यह संपूर्ण सुरक्षा बल प्रणाली के लिए एक मजबूत संदेश है कि न्याय से ऊपर कोई नहीं।
👉 CISF, सेना, BSF, CRPF और अन्य अर्धसैनिक बलों से जुड़ी ऐसी ही भरोसेमंद और एक्सक्लूसिव खबरों के लिए पढ़ते रहें – SainikNews.com

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